
इंसानी गतिविधियों से पिघल रहा हिमालय: एवरेस्ट बेस कैंप पर यूरिन और ईंधन बने ग्लेशियरों के लिए खतरा।
एवरेस्ट बेस कैंप पर परवतारोहियो के यूरिन और मानव गतिविधियों से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ रही है। नेपाल और अमेरिका के वैज्ञानिकों की रिसर्च में खुशबू ग्लेशियर पर इसका असर सामने आया है। अध्ययन के अनुसार यूरिन से पैदा हुई गर्मी के कारण करीब 154 टन बरफ पिघलने का अनुमान लगाया गया। हालांकि ग्लेशियरों को सबसे अधिक नुकसान बेस कैंप में इस्तेमाल होने वाले ईंधन से होने वाली गर्मी पहुँचा रही है।
मुख्य बिंदु
हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट के खुम्बू ग्लेशियरों पर मानव गतिविधियों का असर बढ रहा है।
नेपाल और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इस पर शोध प्रकाशित किया।
एवरेस्ट बेस कैंप हर साल खुम्बू ग्लेशियर के ऊपर बनाया जाता है, जहाँ लगभग 1600 टेंट लगाए जाते हैं।
कैंप में किचन, शावर, जनरेटर और वाईफाई जैसी सुविधाएं मौजूद रहती है।
इन सुविधाओं से निकलने वाली गर्मी जमीन का तापमान बढाती है, जिससे यूरिन की मात्रा भी बढ जाती है।
वर्ष 2023 के चढाई के सीजन में बेस कैंप पर प्रतिदिन लगभग 6,766 लीटर यूरिन जमा हुआ।
शोधकर्ताओं के अनुसार यूरिन से उत्पन्न गर्मी के कारण करीब 154 टन बरफ पिघली।
ग्लेशियरों के पिघलने में ईधन से पैदा होने वाली गर्मी का योगदान लगभग 94% है।
वही यूरिन से निकलने वाली गर्मी का योगदान करीब 6% बताया गया है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बढती मानव गतिविधियां हिमालयी ग्लेशियरों के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।
