
इंसानी पोटी से बनेगा मजबूत घर, वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक।
वैज्ञानिकों ने इंसानी मल के कचरे से विशेष पाउडर तैयार किया जाता है। इस पाउडर को सीमेंट में मिलाने पर कंक्रीट की मजबूती बढी। परीक्षण में कंक्रीट की दबाव सहन क्षमता 21% तक बढ गई। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग भवन निर्माण में किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
भारत के वैज्ञानिकों ने इंसानी मल के कचरे का उपयोग कर नया निर्माण सामग्री पाउडर बनाया।
जयपुर की मालवीय राष्ट्रीय प्रोधिगिकी संस्थान (MNIT) के शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग किया।
टोयलेट प्लांट से प्राप्त इंसानी मल के कचरे को 350 से 450 डीग्री सेल्सियस पर गर्म किया गया।
गर्म करने के बाद प्राप्त सामग्री को बारीक पाउडर में बदल दिया गया।
इस पाउडर को सीमेंट के 10% हिस्से के स्थान पर कंक्रीट में मिलाया गया।
91 दिनों के परीक्षण में कंक्रीट की दबाव सहन क्षमता 21% और मजबूती 42% तक बढी।
वैज्ञानिकों के अनुसार पाउडर में मौजूद सूक्ष्म छिद्र पानी को धीरे धीरे छोडते है, जिससे कंक्रीट अधिक मजबूत बनती हैं।
फिलहाल यह तकनीक प्रयोग शाला स्तर पर सफल रही है।
भविष्य में इसका उपयोग भवन और अन्य निर्माण कार्यों में किया जा सकता है।
